पटना | 22 मार्च 2026: राजधानी पटना के पटना जंक्शन पर रेल पुलिस (GRP) और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुआ तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर खड़ी फरक्का एक्सप्रेस से पांच तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध बैग से खुला राज
रेल पुलिस को प्लेटफॉर्म पर कुछ संदिग्ध बैगों की सूचना मिली थी। जांच के दौरान जब बैग खोले गए तो अंदर बड़ी संख्या में जिंदा कछुए ठूंसे हुए मिले। पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे, लेकिन सभी को मौके पर ही पकड़ लिया गया।
कछुओं के साथ क्रूरता की हद
वन विभाग के अनुसार, तस्करों ने कछुओं के मुंह पर क्लिप लगा रखी थी ताकि वे आवाज न कर सकें। उनके पैरों को रस्सियों से कसकर बांधा गया था। बैग के अंदर हवा की कमी के कारण एक कछुए की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल अवस्था में मिले हैं। सभी जीवित कछुओं को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए भेजा गया है।
वाराणसी से कोलकाता तक फैला नेटवर्क
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे वाराणसी के गंगा घाटों से कछुए पकड़ते थे और उन्हें कोलकाता ले जाकर बेचते थे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस तस्करी के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी पांच लोगों—पप्पू कुमार, आकाश कुमार, रजत कुमार, अक्षय कुमार और गीता देवी—को गिरफ्तार किया है। सभी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
क्यों होती है कछुओं की तस्करी?
जानकारों के मुताबिक कछुओं की तस्करी के पीछे कई कारण हैं—
अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र
मांस की अवैध बिक्री
पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल
आगे की कार्रवाई
रेल पुलिस और वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटे हैं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

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